देहरादून। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को नई धार देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। पार्टी ने प्रदेश कार्यसमिति की नई सूची जारी करते हुए कुल 178 नेताओं को अलग-अलग श्रेणियों में जिम्मेदारी सौंपी है। इसे चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने और प्रदेशभर में पार्टी के नेताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।
भाजपा की ओर से जारी सूची में नेताओं को विशेष आमंत्रित सदस्य, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य और स्थाई आमंत्रित सदस्य की तीन श्रेणियों में शामिल किया गया है। इनमें 32 विशेष आमंत्रित सदस्य, 121 प्रदेश कार्यसमिति सदस्य और 25 स्थाई आमंत्रित सदस्य बनाए गए हैं।
सभी जिलों को प्रदेश कार्यसमिति में प्रतिनिधित्व
प्रदेश कार्यसमिति सदस्यों की सूची में उत्तराखंड के सभी जिलों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। 121 सदस्यीय इस सूची के जरिए पार्टी ने संगठन के विभिन्न क्षेत्रों और जिलों से जुड़े नेताओं को प्रदेश स्तर पर स्थान देने का प्रयास किया है। माना जा रहा है कि इससे आगामी चुनाव में बूथ स्तर से लेकर प्रदेश संगठन तक समन्वय मजबूत करने में मदद मिलेगी।
वहीं, 32 विशेष आमंत्रित सदस्यों की सूची में प्रदेश के अधिकांश जिलों को प्रतिनिधित्व मिला है। हालांकि पौड़ी और चंपावत जिले से किसी नेता को इस श्रेणी में स्थान नहीं मिला है।
सरकार और संगठन के बीच समन्वय पर जोर
25 स्थाई आमंत्रित सदस्यों की सूची में भाजपा के प्रमुख राजनीतिक चेहरों को शामिल किया गया है। इसमें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अलावा मंत्रिमंडल के सदस्य, पार्टी के सांसद और विधायक भी शामिल हैं। इस व्यवस्था के जरिए सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाने का प्रयास दिखाई देता है।
चुनावी तैयारियों को मिलेगी गति
भाजपा की यह संगठनात्मक घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। पार्टी जहां सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है, वहीं संगठन को भी चुनावी मोर्चे पर सक्रिय करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
प्रदेश कार्यसमिति में बड़ी संख्या में नेताओं को शामिल किए जाने से पार्टी के भीतर क्षेत्रीय और संगठनात्मक स्तर पर जिम्मेदारियों का दायरा बढ़ा है। पार्टी की रणनीति में अनुभवी नेताओं के साथ विभिन्न क्षेत्रों के पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को जोड़कर एक मजबूत चुनावी टीम तैयार करना प्रमुख रूप से शामिल माना जा रहा है।
नई सूची के जरिए भाजपा ने संगठन, सरकार और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय को मजबूत करने का संदेश दिया है। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए अब इन पदाधिकारियों की सक्रियता और उन्हें मिलने वाली जिम्मेदारियां संगठन की चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।




