मसूरी। देहरादून-मसूरी मार्ग पर पानी वाले बैंड और गलोगीधार के बीच लगातार हो रहे भूस्खलन और सड़क धंसने की घटनाओं को लेकर लोक निर्माण विभाग (PWD) अब वैज्ञानिक जांच कराएगा। विभाग ने पहाड़ के भीतर की स्थिति जानने के लिए विशेषज्ञों की मदद लेने का फैसला किया है। आशंका जताई जा रही है कि पहाड़ के अंदर पानी जमा होने, भूमिगत जलधारा सक्रिय होने या किसी नए जलस्रोत के बनने से मिट्टी कमजोर पड़ रही हो सकती है।
PWD के मुख्य अभियंता दयानंद ने प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण कर सड़क की स्थिति, मलबे की आवाजाही, धंसाव वाले हिस्सों और जल निकासी व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि जांच के बाद ही भूस्खलन की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।
पहाड़ के भीतर पानी की तलाश के लिए ERT तकनीक का सहारा
विभाग अब इलेक्ट्रिकल रेसिस्टिविटी टोमोग्राफी (ERT) तकनीक से पहाड़ के भीतर की संरचना का परीक्षण कराएगा। इसके माध्यम से यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि कहीं भूमिगत पानी जमा तो नहीं है, कोई प्राकृतिक जलस्रोत सक्रिय तो नहीं हुआ है या पहाड़ के अंदर किसी जलधारा का बहाव तो नहीं हो रहा है।
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यदि पहाड़ के भीतर पानी का दबाव या भूगर्भीय कमजोरी सामने आती है तो उसी के अनुरूप जल निकासी और पहाड़ को स्थिर करने की योजना तैयार की जाएगी।
केंद्रीय विशेषज्ञों की टीम करेगी विस्तृत सर्वे
भूस्खलन की समस्या की जड़ तक पहुंचने के लिए उत्तराखंड के विशेषज्ञों के साथ केंद्रीय स्तर के विशेषज्ञों को भी सर्वे में शामिल किया जाएगा। जांच रिपोर्ट में भूस्खलन के कारणों के साथ सड़क को स्थायी रूप से सुरक्षित बनाने के उपाय सुझाए जाएंगे। इसके आधार पर सड़क और पहाड़ के उपचार की विस्तृत कार्ययोजना बनाई जाएगी।
बंद नालियों और कल्वर्ट को खोलना प्राथमिकता
PWD ने फिलहाल जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने को सबसे अहम कदम माना है। अधिकारियों को सड़क किनारे बंद पड़े नालों और कल्वर्ट की तत्काल सफाई के निर्देश दिए गए हैं। विभाग का मानना है कि बारिश का पानी यदि सड़क के नीचे या पहाड़ के भीतर लगातार प्रवेश करता रहा तो मिट्टी कमजोर होने और धंसाव की समस्या बढ़ सकती है।
सड़क का नए सिरे से निर्माण भी विकल्प
प्रभावित हिस्सों में तकनीकी आवश्यकता के अनुसार पहाड़ की बैक कटिंग कर सड़क को नए सिरे से तैयार करने की संभावना भी तलाशी जा रही है। हालांकि विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल ऊपरी सतह की मरम्मत से स्थायी समाधान संभव नहीं है। पहले पहाड़ के खिसकने की वास्तविक वजह का पता लगाया जाएगा, इसके बाद ही स्थायी उपचार और पुनर्निर्माण की योजना बनाई जाएगी।
अवैध निर्माण और अतिक्रमण भी जांच के घेरे में
सड़क के आसपास हुए निर्माण और संभावित अतिक्रमण की भी जांच की जाएगी। विभाग यह भी देखेगा कि निर्माण गतिविधियों का जल निकासी और पहाड़ की स्थिरता पर कोई असर तो नहीं पड़ रहा है। नियमों के विपरीत निर्माण पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
लगातार बारिश के बीच पानी वाले बैंड क्षेत्र में मलबा आने और सड़क धंसने का खतरा बना हुआ है। ऐसे में विभाग अब अस्थायी मरम्मत के बजाय वैज्ञानिक जांच के जरिए समस्या की जड़ तक पहुंचकर स्थायी समाधान तलाशने की तैयारी में है।





