30 साल पुराने हादसे से जुड़ा मामला, छात्रों के बेहोश होने की घटनाओं के बाद बढ़ा अंधविश्वास
बागेश्वर के कौसानी स्थित राजकीय इंटर कॉलेज में ‘भूत मंदिर’ बनाने के नाम पर छात्रों से ₹100-₹100 वसूले जाने का मामला सामने आया है। घटना के खुलासे के बाद शिक्षा विभाग ने जांच बैठा दी है।
उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के कौसानी स्थित राजकीय इंटर कॉलेज में अंधविश्वास और नियमों की अनदेखी का गंभीर मामला उजागर हुआ है। आरोप है कि स्कूल परिसर में ‘भूत मंदिर’ बनाए जाने के लिए छात्रों से ही पैसे जुटाए गए।
सूत्रों के अनुसार मंदिर निर्माण के लिए प्रत्येक छात्र से 100 रुपये वसूले गए। कुल 218 छात्रों से लगभग 21,800 रुपये एकत्र किए गए, जबकि शिक्षकों के योगदान को मिलाकर कुल राशि करीब 25 हजार रुपये बताई जा रही है। स्कूल जैसे स्थान पर इस तरह की वसूली और अंधविश्वास को बढ़ावा देने के आरोपों ने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि यह पूरा मामला करीब 30 साल पहले एक नेपाली मजदूर की मृत्यु के हादसे से जुड़ा है। उस घटना को लेकर समय के साथ तरह-तरह की अफवाहें फैलती रहीं और इसे भटकती आत्मा से जोड़ दिया गया। धीरे-धीरे यह डर स्थानीय स्तर पर इतना गहरा हो गया कि इसका असर स्कूल के माहौल पर भी दिखने लगा।
हाल के दिनों में कुछ छात्रों के अचानक बेहोश होने और अजीब व्यवहार करने की घटनाएं सामने आईं। जहां कुछ लोग इसे ‘मास हिस्टीरिया’ मान रहे हैं, वहीं कई अभिभावक इसे अलौकिक घटना मान रहे हैं। इसी माहौल में अभिभावक संघ द्वारा स्कूल परिसर में एक छोटा ढांचा बनवाया गया, जिसे ‘भूत मंदिर’ कहा जा रहा है।
सीईओ ने दिए जांच के आदेश
मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। बागेश्वर के मुख्य शिक्षा अधिकारी विनय कुमार ने जांच के आदेश दे दिए हैं। मुख्य शिक्षा अधिकारी ने गरुड़ खंड शिक्षा अधिकारी को एक सप्ताह के भीतर पूरी जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूलों में इस तरह की गतिविधियां बच्चों की सोच पर नकारात्मक असर डालती हैं। उनका मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना है, ऐसे में ‘भूत मंदिर’ जैसी घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं।
कौसानी का यह मामला सिर्फ ₹100 की वसूली नहीं, बल्कि उस सोच का सवाल है जहां शिक्षा के बीच अंधविश्वास अपनी जगह बना रहा है।




