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Uttarakhand

भानियावाला–जॉलीग्रांट–ऋषिकेश हाईवे परियोजना पर NHAI का जवाब, पर्यावरण संबंधी दावों को बताया भ्रामक

Khabar 360 India Desk
Last updated: July 11, 2026 10:27 am
Khabar 360 India Desk Published July 11, 2026
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*भानियावाला–जॉलीग्रांट–ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना में पर्यावरण एवं वन संरक्षण संबंधी भ्रामक दावों पर एनएचएआई का स्पष्टिकरण*

– भानियावाला–जॉलीग्रांट–ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना में आधुनिक एवं सुरक्षित सड़क अवसंरचना के साथ पर्यावरण संरक्षण तथा वन्यजीवों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई –  सौरभ सिंह, परियोजना निदेशक, पीआईयू देहरादून, एनएचएआई

– कुछ समाचार लेखों एवं सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया जा रहा कि NHAI एवं वन विभाग उच्च न्यायालय के आदेशों के विरुद्ध वृक्षों की कटाई कर रहे हैं, यह दावे तथ्यात्मक रूप से गलत एवं भ्रामक हैं-  सौरभ सिंह, परियोजना निदेशक, पीआईयू देहरादून, एनएचएआई

– पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण योजनाओं के लिए एनएचएआई ने ₹6.04 करोड़ से अधिक जमा किए हैं –  सौरभ सिंह, परियोजना निदेशक, पीआईयू देहरादून, एनएचएआई

शुक्रवार को भानियावाला–जॉलीग्रांट–ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना को लेकर पर्यावरण एवं वन संरक्षण संबंधी भ्रामक दावों पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने स्पष्टिकरण देते हुए कहा कि यह परियोजना केवल आधुनिक एवं सुरक्षित सड़क अवसंरचना के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि योजना के क्रियान्वयन में पर्यावरण संरक्षण, वन क्षेत्र के संरक्षण तथा वन्यजीवों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

सौरभ सिंह, परियोजना निदेशक, पीआईयू देहरादून, एनएचएआई ने कहा कि “भानियावाला–जॉलीग्रांट–ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना की इंजीनियरिंग डिजाइन तैयार करते समय सड़क क्षमता में वृद्धि के साथ-साथ पर्यावरणीय प्रभाव को न्यूनतम रखना उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में रहा है। परियोजना के वन क्षेत्र वाले हिस्से में राइट ऑफ वे को यथासंभव कम रखा गया है। साथ ही उत्तराखंड वन विभाग, WWF-India तथा भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून के तकनीकी परामर्श के आधार पर हाथियों एवं अन्य वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए एलीफेंट अंडरपास, बॉक्स कल्वर्ट, पाइप कल्वर्ट तथा अन्य वैज्ञानिक वन्यजीव शमन उपायों को परियोजना की डिजाइन का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है। इन उपायों से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन को सुरक्षित बनाए रखने के साथ-साथ वर्तमान सड़क पर वाहनों की टक्कर से होने वाली वन्यजीव मृत्यु की घटनाओं में भी उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। एनएचएआई का प्रयास ऐसा राजमार्ग विकसित करना है, जो भविष्य की यातायात आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन एवं वन्यजीव संरक्षण के उच्च मानकों पर भी खरा उतरे।”

उन्होंने कहा कि परियोजना के निर्माण के दौरान अतिरिक्त वन भूमि के उपयोग को न्यूनतम रखने के उद्देश्य से संपूर्ण कार्य मौजूदा राइट ऑफ वे के भीतर किया जा रहा है। पर्यावरणीय प्रभाव कम करने के लिए परियोजना के वन क्षेत्र में आरओडब्लू को 60 मीटर से घटाकर मात्र 23 मीटर किया गया है, जिससे अनावश्यक वन क्षेत्र प्रभावित होने से बचाया जा सके। एनएचएआई ने प्रतिपूरक वनीकरण तथा उसके अगले 10 वर्षों के रखरखाव के लिए ₹1.97 करोड़ से अधिक की राशि जमा की है। इसके अतिरिक्त, प्रतिपूरक वनीकरण एवं राज्य में हरित क्षेत्र बढ़ाने के उद्देश्य से 40 हेक्टेयर गैर-वन भूमि राज्य सरकार द्वारा वन विभाग को हस्तांतरित की गई है, जिससे भविष्य में व्यापक स्तर पर नए वन विकसित किए जा सकें। वन एवं पर्यावरण संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए ‘वन्यजीव राहत योजना’ तथा ‘मिट्टी व जल संरक्षण योजना’ के क्रियान्वयन हेतु भी NHAI द्वारा ₹6.04 करोड़ से अधिक की राशि जमा कराई गई है।

परियोजना में हाथियों एवं अन्य बड़े वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए 01 प्रमुख ब्रिज-कम-एलीफेंट अंडरपास तथा 04 समर्पित एलीफेंट अंडरपास (लगभग 3.5 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड संरचना) का निर्माण किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त बाघ, तेंदुआ, सियार, जंगल बिल्ली, साही, जंगली सूअर, सांभर एवं चीतल जैसे वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए 5×3 मीटर आकार के 06 बॉक्स कल्वर्ट तथा सरीसृप, उभयचर एवं अन्य छोटे वन्यजीवों के लिए 1200 मिमी व्यास के 13 पाइप कल्वर्ट विकसित किए जा रहे हैं।

वन्यजीवों की सुरक्षा को और सुदृढ़ बनाने के लिए परियोजना में ग्रीन गाइड हेज, साउंड बैरियर, एंटी-ग्लेयर स्क्रीन, वन्यजीव चेतावनी संकेतक, स्पीड कैल्मिंग उपाय तथा ‘नो हॉर्न’ जोन जैसी व्यवस्थाएँ भी शामिल की गई हैं। इन सभी उपायों का उद्देश्य मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना, सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना तथा वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और आवागमन को सुरक्षित बनाए रखना है।

परियोजना से प्रभावित 4,369 वृक्षों में से 754 वृक्षों को फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक आकलन के आधार पर प्रत्यारोपित किया जाएगा, जबकि शेष वृक्षों का नियमानुसार प्रबंधन किया जाएगा। NHAI का प्रयास है कि जहाँ भी संभव हो, परिपक्व वृक्षों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर हरित आवरण को संरक्षित रखा जाए।

सौरभ सिंह, परियोजना निदेशक, पीआईयू देहरादून, एनएचएआई ने आगे बताया कि कुछ समाचार लेखों एवं सोशल मीडिया पोस्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि NHAI एवं वन विभाग माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों के विरुद्ध वृक्षों की कटाई कर रहे हैं। यह दावा तथ्यात्मक रूप से गलत एवं भ्रामक है। इस संबंध में मा. उच्च न्यायालय में एक अवमानना याचिका भी दायर की गई थी, जिसे मा. न्यायालय द्वारा खारिज कर दिया गया। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि NHAI सभी वैधानिक एवं पर्यावरणीय आवश्यकताओं का पालन करते हुए माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों का पूर्ण अनुपालन कर रहा है। परियोजना का निर्माण सभी आवश्यक वन एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियाँ तथा सक्षम प्राधिकारियों से आवश्यक अनुमतियाँ प्राप्त होने के उपरांत ही प्रारंभ किया गया है। परियोजना के प्रत्येक चरण में न्यायालय के निर्देशों, वन एवं पर्यावरण संबंधी स्वीकृतियों तथा निर्धारित शर्तों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जा रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण का विश्वास है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। भानियावाला–जॉलीग्रांट–ऋषिकेश परियोजना इसका उदाहरण है, जहाँ आधुनिक सड़क अवसंरचना के साथ-साथ वन संरक्षण, जैव विविधता और हरित आवरण को समान महत्व देते हुए कार्य किया जा रहा है। NHAI भविष्य में भी सतत विकास के सिद्धांतों के अनुरूप कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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