देहरादून, 23 सितंबर 2026। निदेशालय, आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाएं, उत्तराखंड में बुधवार को “आयुर्वेद दिवस 2026” का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन “आयुर्वेद अपनाएं, स्वस्थ निरोगी जीवन पाएं” के पावन ध्येय वाक्य के साथ किया गया। इस अवसर पर आयुर्वेदिक जीवनशैली को बढ़ावा देने तथा स्वस्थ समाज के निर्माण में आयुर्वेद की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम में श्रीमती रंजना राजगुरु, सचिव, आयुष एवं आयुष शिक्षा, उत्तराखंड शासन ने विशेष रूप से आयुर्वेद जीवनशैली को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ जीवनशैली और आयुर्वेदिक पद्धतियों को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर अनेक जीवनशैली जनित समस्याओं से बचाव किया जा सकता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्वाह्न 11:00 बजे अतिथियों एवं विद्वतजनों के स्थान ग्रहण करने के साथ हुआ। इसके पश्चात दीप प्रज्वलन एवं अतिथि सत्कार किया गया। डॉ. आर.पी. सिंह, निदेशक, आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाएं, उत्तराखंड ने स्वागत संबोधन प्रस्तुत किया। उन्होंने आयुर्वेद की प्राचीन परंपरा, वर्तमान समय में इसकी उपयोगिता तथा आमजन तक आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों पर साझा किए विचार
आयुर्वेद दिवस के अवसर पर विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में विशेषज्ञों ने आयुर्वेद, स्वास्थ्य, शोध, नवाचार और जीवनशैली से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जानकारी साझा की।
डॉ. अनुप गक्खड़ ने “जीवनशैली जनित विकारों में आयुर्वेद” विषय पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बदलती जीवनशैली के कारण उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और उनके प्रबंधन में आयुर्वेद की भूमिका पर प्रकाश डाला।
डॉ. प्रदीप भारद्वाज ने “रिसर्च एंड इनोवेशन इन आयुर्वेद” विषय पर अपने विचार रखते हुए आयुर्वेद के क्षेत्र में अनुसंधान एवं नवाचार के महत्व को रेखांकित किया।
वैद्य हर्ष सहगल ने “प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी इन आयुर्वेद” विषय पर प्रकाश डाला और हृदय स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता तथा निवारक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर चर्चा की।
इसी क्रम में डॉ. जे.एन. नौटियाल ने “आयुर्वेद में पंचकर्म का महत्व” विषय पर अपने विचार रखे। वहीं डॉ. राजीव कुरेले ने “धन्वंतरी पूजन—आयुर्वेद की शाश्वत परंपरा” विषय पर वक्तव्य दिया और आयुर्वेद की परंपरागत विरासत एवं उसके सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला।
आयुर्वेद को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का संकल्प
अपराह्न 3:30 बजे मुख्य अतिथि का स्वागत किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री मदन कौशिक, माननीय मंत्री, आयुष एवं आयुष शिक्षा विभाग, उत्तराखंड सरकार ने सभा को संबोधित किया।
अपने संबोधन में आयुष मंत्री ने आयुर्वेद को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के प्रति संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देश का वातावरण आयुर्वेद के विकास के लिए अनुकूल है और विभिन्न राज्य इस दिशा में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि निजी क्षेत्र में “आयुर्वेद शिक्षा बोर्ड” की स्थापना के साथ एकीकृत पाठ्यक्रम तैयार करने तथा कौशल विकास के लिए निरंतर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
आयुष मंत्री ने देश के विभिन्न राज्यों, विशेषकर केरल सहित अन्य क्षेत्रों के इच्छुक प्रतिभागियों को भी इस राष्ट्रीय अभियान से जुड़ने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा आयुर्वेद को विभिन्न स्तरों पर प्रोत्साहित किया जा रहा है तथा विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी इस प्राचीन चिकित्सा पद्धति को वैश्विक मंच पर स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं।
धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम के अंत में राज्य औषधि अनुज्ञापन प्राधिकारी, उत्तराखंड द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही आयुर्वेद दिवस 2026 का कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
आयुर्वेद दिवस के आयोजन के माध्यम से आयुर्वेदिक जीवनशैली, निवारक स्वास्थ्य देखभाल, अनुसंधान एवं नवाचार तथा आयुर्वेद की पारंपरिक ज्ञान-परंपरा को आमजन तक पहुंचाने का संदेश दिया गया।





