विधानसभा चुनाव से पहले जनता का घोषणा पत्र तैयार करने पर बनी सहमति, रचनात्मक कांग्रेस और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने राज्य के ज्वलंत मुद्दों पर किया मंथन
देहरादून। रचनात्मक कांग्रेस और विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से हरिद्वार बाईपास स्थित संस्कृति विभाग के ऑडिटोरियम में ‘उत्तराखंड जनसंवाद’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। दिनभर चले इस कार्यक्रम में राज्य से जुड़े जमीन, भू-कानून, पलायन, पर्यावरण, महिला सुरक्षा, दलित उत्पीड़न, अल्पसंख्यक अधिकार, किसानों की समस्याओं, अनियोजित शहरीकरण और लोक संस्कृति समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने इन सवालों को लेकर सामूहिक रूप से आवाज उठाने और विधानसभा चुनाव से पहले जनता का घोषणा पत्र तैयार करने पर सहमति जताई।

कार्यक्रम तीन सत्रों में आयोजित हुआ। पहले सत्र में अलग-अलग विषयों पर समूह चर्चा हुई, जिसमें पैनलिस्टों के साथ आम प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे। वरिष्ठ पत्रकार जयसिंह रावत ने भू-कानून के मुद्दे पर कहा कि समय-समय पर किए गए बदलावों के कारण उत्तराखंड की जमीन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
डॉ. प्रेम बहुखंडी ने पलायन को लेकर कहा कि पलायन को केवल समस्या के रूप में देखने के बजाय उन परिस्थितियों पर भी चर्चा जरूरी है, जिनके कारण लोग अपने गांव छोड़ने को मजबूर होते हैं। उन्होंने गांवों से बाहर गए लोगों के वापस लौटने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। विजय भट्ट ने अनियोजित शहरीकरण को लेकर चिंता जताई।
अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े मुद्दों पर वरिष्ठ पत्रकार एमएसए काजमी और एडवोकेट रजिया बेग ने अपनी बात रखी। वहीं आरपी विशाल और जबर सिंह ने दलित उत्पीड़न की घटनाओं का मुद्दा उठाते हुए सामाजिक बराबरी और न्याय की व्यवस्था को मजबूत किए जाने की आवश्यकता बताई।
पत्रकार त्रिलोचन भट्ट ने साम्प्रदायिक और दलित उत्पीड़न के मामलों में मीडिया की भूमिका पर विचार रखे। राहुल कोटियाल ने सरकारी जमीनों की बिक्री को लेकर चिंता जताई। महिला मुद्दों पर दीपा कौशल ने कहा कि महिलाओं को आज भी परिवार के सामान्य निर्णयों में पर्याप्त भागीदारी नहीं मिलती। उन्होंने उत्पीड़न के मामलों में पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाने के लिए प्रभावी व्यवस्था की आवश्यकता बताई।
सामाजिक कार्यकर्ता अरण्य रंजन ने पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या के बीच जरूरी व्यवस्थाओं को मजबूत करने की जरूरत उठाई। सरदार तेजिन्दर सिंह ने किसानों की समस्याओं के समाधान की मांग की। संजय जैन ने संविधान के मूल्यों और समाजवाद से जुड़े विषयों पर विचार रखे।
विकास परियोजनाओं के नाम पर पेड़ों की कटाई का मुद्दा भी चर्चा में रहा। हिमांशु अरोड़ा ने पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया, जबकि अमन गुप्ता ने ट्रांसजेंडर समुदाय के साथ होने वाले भेदभाव को खत्म करने की बात कही। जगदम्बा मैठाणी ने पहाड़ के कुटीर उद्योगों के सामने मौजूद चुनौतियों को उठाया। कार्यक्रम में किसाऊ बांध, लोक कलाकारों की उपेक्षा और प्राकृतिक जलधाराओं के लगातार प्रभावित होने जैसे मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में रहे।
रचनात्मक कांग्रेस के मुख्य सारथी संदीप दीक्षित ने संगठन के उद्देश्य और कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि रचनात्मक कांग्रेस को कांग्रेस का मंच नहीं, बल्कि जन संगठनों का मंच बनाया गया है। उनके अनुसार, सत्ता में आने वाली किसी भी सरकार के कामकाज पर नजर रखना और जरूरत पड़ने पर सरकार को जनता के सवालों के प्रति जवाबदेह बनाना मंच की भूमिका होगी।
कार्यक्रम में उत्तराखंड इंसानियत मंच के डॉ. रवि चोपड़ा, उत्तराखंड महिला मंच की निर्मला बिष्ट, विमला कोली, पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा, सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश भाई, गरिमा दसौनी और सुजाता पॉल समेत विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी राज्य के मुद्दों के समाधान को लेकर सुझाव दिए।
कार्यक्रम का संचालन रचनात्मक कांग्रेस के प्रदेश सारथी भुवन पाठक ने किया। संवाद के दौरान विभिन्न संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उत्तराखंड के जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को साझा मंच पर उठाने और आगामी विधानसभा चुनाव से पहले जनता की प्राथमिकताओं पर आधारित घोषणा पत्र तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमति जताई।





