डीजीसीए के नए नियमों से संचालन महंगा होने का हवाला, अगले साल की चारधाम यात्रा में लागू हो सकता है फैसला
देहरादून। चारधाम यात्रा में चार्टर्ड हेली सेवा के संचालन को लेकर हेली ऑपरेटरों और नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के बीच विवाद खड़ा हो गया है। चार्टर्ड हेलिकॉप्टर में को-पायलट अनिवार्य करने के डीजीसीए के फैसले का ऑपरेटरों ने विरोध किया है। इसके चलते ऑपरेटरों ने सोमवार से चार्टर्ड हेली सेवा का संचालन बंद करने का एलान किया है। ऑपरेटरों का कहना है कि नए नियम लागू होने से सेवा का संचालन आर्थिक रूप से मुश्किल हो जाएगा। वहीं, चारधाम यात्रा 16 नवंबर को शीतकाल के लिए स्थगित होने के मद्देनजर नए नियम अगले वर्ष की यात्रा में लागू किए जाने पर विचार किया जा सकता है।
दरअसल, 30 अक्टूबर को चमोली जिले में ज्योतिर्मठ के समीप बदरीनाथ से लौट रहा ट्रांस भारत एविएशन का हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस घटना के बाद डीजीसीए ने उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) के साथ बैठक कर चारधाम यात्रा में संचालित चार्टर्ड हेली सेवाओं में को-पायलट अनिवार्य करने का निर्णय लिया। यह व्यवस्था देहरादून के सहस्रधारा हेलीपैड से संचालित चार्टर्ड सेवाओं पर लागू होनी थी। वहीं, केदारनाथ धाम के लिए गुप्तकाशी, सिरसी और फाटा से संचालित शटल हेली सेवाओं पर भी यह नियम लागू किए जाने की बात कही गई है।
डीजीसीए के इस फैसले को दो नवंबर से लागू किया जाना था, लेकिन इससे पहले ही हेली ऑपरेटरों ने विरोध शुरू कर दिया। ऑपरेटरों का तर्क है कि हेलिकॉप्टर में को-पायलट रखने से सीटों की उपलब्धता कम होगी और अतिरिक्त क्रू मेंबर का खर्च भी बढ़ेगा। ऐसे में मौजूदा किराये और संचालन व्यवस्था के तहत सेवाएं जारी रखना आर्थिक रूप से व्यवहारिक नहीं होगा।
उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रतीक जैन ने कहा कि हेली सेवा संचालन से जुड़े सभी नियम और सुरक्षा मानक डीजीसीए निर्धारित करता है। यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए चार्टर्ड हेली सेवाओं में को-पायलट अनिवार्य करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि ऑपरेटरों ने अतिरिक्त खर्च के कारण नए नियमों के तहत सेवा संचालित करने में असमर्थता जताई है। डीजीसीए की ओर से मिलने वाले दिशा-निर्देशों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। चारधाम यात्रा समाप्त होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं, ऐसे में डीजीसीए की अनुमति मिलने पर नए नियम अगले साल की यात्रा से लागू करने पर विचार किया जा सकता है।
राजस एयरोस्पोर्ट्स एंड एडवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनीष सैनी ने कहा कि नए नियमों के तहत हेली सेवा का संचालन आर्थिक रूप से संभव नहीं रह जाएगा। को-पायलट रखने से छह सीटों वाले हेलिकॉप्टर में दो सीटें खाली रखनी पड़ेंगी। इसके साथ ही अतिरिक्त क्रू मेंबर का खर्च भी उठाना होगा। ऐसे में उड़ान संचालन का खर्च निकालना मुश्किल हो जाएगा।
सैनी ने कहा कि यदि डीजीसीए नए नियमों पर पुनर्विचार नहीं करता है तो ऑपरेटर चार्टर्ड के साथ केदारनाथ की हेली सेवा भी बंद करने के लिए मजबूर हो सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑपरेटर यात्रियों की सुरक्षा के खिलाफ नहीं हैं और न ही सुरक्षा संबंधी निर्देशों का विरोध कर रहे हैं। यात्रियों की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऑपरेटर सुरक्षित हवाई सेवाओं के पक्षधर हैं और उन्होंने अपनी व्यावहारिक समस्याओं से अधिकारियों को अवगत कराया है।


