देहरादून:08 अक्टूबर, 2025
उत्तराखंड की राजनीति इन दिनों फिर चर्चा में है। कुछ समूह सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं, खासतौर पर राज्य के सूचना विभाग द्वारा जारी विज्ञापनों को लेकर। विरोधी दलों का आरोप है कि करोड़ों रुपये सरकार या मुख्यमंत्री की छवि सुधारने में खर्च किए जा रहे हैं।
हालांकि, सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये विज्ञापन किसी व्यक्ति विशेष की छवि नहीं, बल्कि उत्तराखंड के विकास, संस्कृति, पर्यटन और जनहित योजनाओं के प्रचार के लिए हैं।
चार साल का पारदर्शी कार्यकाल
धामी सरकार के चार वर्ष से अधिक के कार्यकाल में किसी भी विभाग में कोई बड़ा घोटाला या भ्रष्टाचार सामने नहीं आया है। यह सरकार की ईमानदारी और पारदर्शिता का प्रमाण है। बावजूद इसके, कुछ लोग बिना ठोस आधार के सरकार पर आरोप लगाकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
हर संकट में मुख्यमंत्री धामी अग्रिम पंक्ति में
सिल्कियारा टनल हादसा, धराली त्रासदी या किसी भी प्राकृतिक आपदा में मुख्यमंत्री धामी स्वयं मौके पर पहुंचकर राहत कार्यों की निगरानी करते नजर आए। जनता के बीच उनकी छवि एक कर्मशील और संवेदनशील नेता की बन चुकी है।
विज्ञापनों का उद्देश्य — विकास और पहचान
राज्य सरकार के विज्ञापनों का उद्देश्य उत्तराखंड की संस्कृति, पर्यटन, उत्पादों और निवेश की संभावनाओं को देश-विदेश तक पहुंचाना है। इन अभियानों से:
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चारधाम यात्रा को बढ़ावा मिला, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हुई।
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उत्तराखंड को वेडिंग डेस्टिनेशन और फिल्म शूटिंग हब के रूप में पहचान मिली।
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पारंपरिक उत्पादों और लोककला को नई पहचान मिली।
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स्वास्थ्य, सुरक्षा और योजनाओं की जानकारी जनता तक पहुंची।
इन विज्ञापनों से न केवल राज्य की छवि सशक्त हुई बल्कि स्थानीय युवाओं, कलाकारों और व्यापारियों को भी सीधा लाभ मिला है।
राज्यहित सर्वोपरि
राजनीतिक आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन जब आलोचना तथ्यों से परे हो, तो यह राज्य के विकास के हितों को नुकसान पहुंचाती है। मुख्यमंत्री धामी की सरकार लगातार पारदर्शिता, जवाबदेही और जनता की सेवा के मूल्यों पर कार्य कर रही है।
उत्तराखंड आज “देवभूमि” से “विकासभूमि” बनने की राह पर है, और इसमें हर नागरिक का सहयोग आवश्यक है।




